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सोमवार को बाबा महाकाल की आखिरी सवारी:6 सितंबर को श्री महाकालेश्वर की शाही सवारी परिवर्तित मार्ग से ही निकाली जायेगी
6 सितंबर को निकलने वाली भगवान महाकाल की शाही सवारी परिवर्तित मार्ग से ही निकाली जाएगी। सवारी हमेशा की तरह पुजारी एवं कहारों के माध्यम से ही निकाली जाएगी। कोविड प्रोटोकॉल के कारण आमजन सवारी में शामिल नहीं हो सकेंगे। हर साल की तरह पुलिस बैंड अपनी सेवा देगा।
हर साल सावन माह के पहले सोमवार से शुरू होने वाली सवारी भाद्रपद के तीसरे सोमवार को शाही सवारी के रूप में निकाली जाती है। लगातार दो सालों से कोविड-19 की गाइडलाइन के चलते महाकाल की सवारी परिवर्तित मार्ग से ही निकाली जा रही है। इस वजह से श्रद्धालुओं को निराशा हाथ लग रही है। इस संबंध में गुरुवार को सर्किट हाउस में आयोजित बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.मोहन यादव ने कलेक्टर आशीषसिंह व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ निर्णय लिया।
बैठक में महाकाल की सवारी के अतिरिक्त भस्मारती में 50 प्रतिशत श्रद्धालुओं को प्रवेश देने पर भी सहमति दी गई। इसके अलावा विभिन धार्मिक पर्व मनाने के लिये पूर्व की भांति कोविड-19 गाइड लाइन का पालन किया जाएगा। सभी प्रकार के धार्मिक चल समारोह, जुलूस, रैली इत्यादि प्रतिबंधित रहेंगे। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक समारोह का आयोजन नहीं होगा। इस तरह के आयोजन केवल धार्मिक परिसर के अंदर किये जा सकेंगे।
प्रोटोकॉल से दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को कटानी होगी सौ रुपए की रसीद –
महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले वीवीआईपी श्रद्धालुओं जिन्हें प्रशासन की ओर से प्रोटोकॉल उपलब्ध कराया जाता है, उन्हें अब 100 रुपए की रसीद अनिवार्य कर दी गई है। अभी सामान्य श्रद्धालुओं को नि:शुल्क दर्शन की व्यवस्था है जबकि वीआईपी दर्शन के लिए 250 रुपए की रसीद कटाना पड़ती है। इसके लिए ऑनलाइन बुकिंग की जाती है।